Monday, March 30, 2026
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डीएसटीए ने दी अव्यवहारिक रेशनलाइजेशन के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

हरियाणा / कैथल, 28 मार्च। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही रेशनलाइजेशन न स्कूलों के हित में है और न ही शिक्षकों के हित में। यह सिर्फ और सिर्फ इस स्कूली ढांचे को सिकोडऩे और शिक्षकों के पदों को समाप्त करने का षडयंत्र मात्र है। यह बात डेमोक्रेटिक स्कूल टीचर्स एसोसिएशन हरियाणा के चेयरमैन धर्मेंद्र ढांडा, राज्य प्रधान विजेंद्र मोर, राज्य महासचिव सुनील यादव व राज्य प्रेस सचिव बूटा सिंह द्वारा जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जो पदों के मामले में मानदंड तय किए गए हैं वो आरटीई के नियमों के विरुद्ध हैं। एक तरफ तो सरकार त्रिभाषा फॉर्मूला लागू कर रही है और दूसरी तरफ भाषा के पीरियड घटाए जा रहे हैं। जहां कक्षा 6 से 8 में इन भाषाओं के कम से कम 6 पीरियड हुआ करते थे अब घटाकर 5 कर दिए गए हैं। कक्षा 9 से 12 में भी पहले हिंदी के 8-8 पीरियड हुआ करते थे, अब मात्र 6 पीरियड कर दिए गए हैं। संस्कृत प्राध्यापक को लाइब्रेरी का पीरियड दिया गया है और उसे वर्कलोड में भी नहीं जोड़ा जा रहा। उधर अगर कक्षा के सेक्शन की बात करें तो 51 बच्चों के बाद दूसरा सेक्शन बना रहे हैं जबकि आटीई कहती है    प्राइमरी में 25, मिडल में 35 व 9वीं से 12वीं में 40 बच्चों के बाद नया सेक्शन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सब बातों से जाहिर है कि सरकार इस स्कूली शिक्षा के ढांचे को समाप्त करना चाहती है। अत: एसोसिएशन मांग करती है कि रेशनेलाइजेशन करने से पहले संगठनों से बातचीत की जाए और शिक्षा व शिक्षक हित में रेशनेलाइजेशन की जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो शिक्षकों को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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