कैथल, 10 मार्च: चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम में चार गांव गुहणा, जसवंती, बात्ता तथा खेड़ी शेरू के किसानों को 2 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ रमेश वर्मा ने बताया कि खेती में रसायनों के अत्याधिक प्रयोग से समाज को कैंसर जैसी घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है तथा आदमी की औसत आयु भी घट गई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भविष्य की पूंजी और सेहत की खेती है, जिसे अपनाकर हम अपने परिवार समाज और देश को जहर मुक्त भोजन उपलब्ध करवा सकते हैं।केंद्र के वैज्ञानिक डॉ जसबीर सिंह ने कहा कि रसायन मुक्त खेती आज समय की मांग हैं तथा किसानों के पास खुद की जमीन हैं, इसलिए वो सौभाग्यशाली है कि वो अपना शुद्ध अनाज व सब्जियां पैदा करके खा सकते है। उन्होंने आगे कहा कि चारा फ सलों पर कीटनाशकों के प्रयोग से कीटनाशक दूध के माध्यम से सीधे ही शरीर में चले जाते हैं जिससे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ते है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे सबसे पहले अपने खेत में हर रोज प्रयोग होने वाली सब्जियों तथा चारा फ सलों को प्राकृतिक खेती प्रणाली से उगाकर इन्हें जहर मुक्त करें तथा अपना व अपने परिवार की खान-पान की आदत में सुधार करें। मृदा वैज्ञानिक व आयोजक डॉ दीपक कुमार ने किसानों को मिट्टी व पानी जांच करवाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम अपने खेत कि मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता, बल्कि प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उत्पादों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र व दशपर्णी अर्क इत्यादि का उपयोग किया जाता हैं। ये प्राकृतिक उत्पाद मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों कि संख्या बढ़ने में मदद करते हैं और इस पद्धति से पैदा होने वाली फ सलें भी स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार ने किसानों को कहा कि फ सलों की अधिक उपज लेने के लिए खरपतवारों का नियंत्रण करें तथा फ सल में पानी व पोषकतत्वों की कमी न होने दें।



