Monday, March 30, 2026
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भारत विभाजन विभीषिका को नाटक रब राखा के माध्यम से किया जीवंत

कैथल: प्रयास नाटय मंच की ओर से संत निरंकारी सत्संग भवन में रब राखा नाटक के माध्यम से विभाजन विभीषिका के दृश्यों को जीवंत करने का प्रयास किया गया। इस कड़ी में डॉ महिपाल पठानिया द्वारा निर्देशित नाटक रब राखा के विभिन्न दृश्यों ने दर्शकों की आंखें नम कर दी। विभाजन के समय अपने वतन को निकलने के लिए तैयार एक परिवार के सामने जब मां को वहीं पर छोड़ जाने की बात आई तो परिवार के सदस्य बिलख बिलख कर रोते हुए इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि मां को छोड़ा जाए। लेकिन परिस्थितियों के कारण मां को छोडऩा आवश्यक लगा तो वे सभी जब सुबह चार बजे निकलने वाले थे तो मां सबके लिए रोटियां लेकर आई और उनका यह वाक्य सबकी आंखों को नम कर गया कि बेटा, मुझे चाहे यहीं छोड़ जाओ मगर रास्ते में तुम्हें भूख लगेगी तो ये रोटियां जरुर खा लेना। इस अवसर पर  हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य सम्मान से सम्मानित लेखक एवं शिक्षाविद डॉ प्रद्युम्न भल्ला, मोहित वधवा, निरंकारी सत्संग भवन कैथल शाखा के संयोजक राजेंद्र जुनेजा के साथ दर्शकों ने उनकी टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। डॉ प्रद्युम्न भल्ला ने प्रयास नाटय मंच का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिभा परिचय की या उम्र की मोहताज नहीं होती। उन्होंने कहा कि आगे भी महिपाल पठानिया द्वारा निर्देशित नाटकों के मंचन होते रहेंगे ताकि नए-नए कलाकारों को ढूंढ कर उनकी प्रतिभा को समाज के सामने लाया जा सके। डॉ पठानिया ने भी सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन मोहित वधवा ने किया।

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