Monday, March 30, 2026
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रोजगार मांगने की बजाए रोजगार देने वाले बनें युवा-डीसी प्रीति

 

जीवन में सफल होने के लिए लक्ष्य और उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्किल का होना जरूरी…
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ग्योंग डीसी प्रीति ने किया पीएनबी बैंक द्वारा संचालित ग्योंग गांव में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान का दौरा, प्रशिक्षणार्थियों से की बातचीत..
कैथल,  24 मार्च। डीसी प्रीति ने कहा कि युवा रोजगार मांगने की बजाए रोजगार देने वाले बनें। इसके लिए उन्हें जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे हासिल करने के लिए स्वयं में कौशल का विकास करना होगा। कौशल, मेहनत, लगन और अनुशासन के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ग्योंग युवाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर आत्मनिभर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। बेरोजगार युवा यहां से प्रशिक्षण हासिल कर न केवल स्वयं का बल्कि दूसरों के रोजगार का भी मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।डीसी प्रीति सोमवार को पीएनबी बैंक द्वारा ग्योंग गांव में संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में अपने दौरे के दौरान प्रशिक्षणार्थियों संबोधित कर रहीं थी। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि यह कोर्स पूरा करने के बाद नौकरी की तलाश में भटकने की बजाय स्वरोजगार स्थापित करके ओर लोगों को भी रोजगार प्रदान करें। अपने अंदर इतना कौशल पैदा करें कि आपके काम की मांग हो। जैसे आप ब्यूटी पार्लर या टेलरिंग आदि का काम सीख कर जाते हैं तो अपने काम की बदौलत आपका गांव या शहर में नाम हो। संख्या की बजाए गुणवता पर जोर देना। एक बार कोई आपसे काम करवा लें तो दोबारा आपके पास ही आए। किसी भी कार्य में अपना शत प्रतिशत देंगे तो उसका परिणाम बहुत अच्छा मिलेगा। डीसी प्रीति ने संस्थान के कोर्स एवं विद्यार्थियों की संख्या आदि के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही युवतियों से भी बातचीत और संस्थान के बारे में फीडबैक लिया। डीसी ने यहां दिए जा रहे आर्टिफिसिशल ज्वैलरी, मशरूम उत्पादन, सॉफ्ट टॉय उत्पादन जैसे प्रशिक्षण की सराहना की। उन्होंने एलडीएम को निर्देश दिए कि वे आईटीआई तथा कालेजों में कैंप लगाकर इस प्रशिक्षण संस्थान के बारे में जागरूक करें, ताकि अधिक से अधिक युवक व युवतियों इसका फायदा उठाकर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण के बाद संबंधित युवाओं को ऋण दिलवाकर उनके उत्पाद की बिक्री के लिए भी संस्थान प्रयास करे। जरूरत महसूस हो तो दूसरे सरकारी विभागों से भी मदद लें। इसके लिए आपसी तालमेल से काम करना होगा।अग्रणी बैंक प्रबंधक एसके नंदा ने बताया कि यह संस्थान युवाओं को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है, ताकि वे स्वरोजगार स्थापित कर सकें और अपने जीवन में आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। यहां पर कृषि, पशुपालन, बुनाई, सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मोबाइल मरम्मत, कंप्यूटर शिक्षा, शॉफ्ट खिलौने बनाना, फ्रीज ऐसी रिपेयर, बिजली के उपकरण ठीक करना, ड्रेस डिजाइनिंग तथा बैग बनाना आदि के कोर्स दस दिन से एक महीने के कोर्स निशुल्क करवाए जाते हैं। संस्थान के निदेशक धमेंद्र कथूरिया ने बताया कि यह संस्थान ग्योंग गांव में वर्ष 2014 से सुचारू रूप से चल रहा है। इस संस्थान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के गरीब एवं पिछड़े वर्ग के युवाओं को अपना कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्थान के द्वारा अब तक कुल 279 स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 7420 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण ले चुके हैं और 4161 ने अपना कार्य शुरू कर लिया है। यहां पर प्रशिक्षणार्थियों के लिए होस्टल की सुविधा, भोजन की व्यवस्था निशुल्क प्रदान की जाती है।
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