आज देशभर में होलिका दहन मनाई जाएगी..
यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं और इसका सूतक काल मान्य होगा या नहीं।साल का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च 2025 यानी कल सुबह 9 बजकर 29 मिनट से शुरू होगा और समापन दोपहर 3 बजकर 29 मिनट पर होगा।यह चंद्र ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी अफ्रीका, यूरोप, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक महासागर, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में दिखाई देगा।
कैथल, 13 मार्च : ज्योतिष पवन के अनुसार.. होलिका दहन 13 मार्च और होली 15 मार्च को मनेगी। फाल्गुन पूर्णिमा दो दिन होने से होलिका दहन के एक दिन बाद होली मनेगी। फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत 13 मार्च और स्नान-दान की पूर्णिमा 14 मार्च को होगी। 15 मार्च को उदय व्यापिनी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में होली रात्रि 10.47 बजे खत्म होगी।पंचांगों के अनुसार 13 मार्च की रात पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। भद्रा भी रात 10.47 बजे खत्म होगा। इसके बाद होलिका दहन होगा।(14 मार्च को स्नान-दान की पूर्णिमा) कुलदेवता को सिंदूर अर्पण किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा में होलिका दहन करना वर्जित माना जाता है। रंगोत्सव का पर्व होली उदय व्यापिनी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में मनेगा। होली के दिन सुबह 7.46 बजे तक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र इसके बाद पूरे दिन हस्त नक्षत्र विद्यमान रहेगा। शास्त्रों के अनुसार होली में लाल.पीला व गुलाबी रंग का प्रयोग शुभ माना जाता है।रोग-शोक निवृत्ति हेतु होलिका की होगी पूजा होलिका दहन के दिन होलिका की पूजा में अक्षत.गंगाजल.रोली-चंदन. मौली. हल्दी. दीपक. मिष्ठान आदि से पूजन होगा। पूजन के बाद होलिका में गुड़. कर्पूर.तिल. धुप. गुगुल. जौ. घी. आम की लकड़ी, गाय के गोबर से बने उपले डालकर सात बार परिक्रमा करने से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि में वृद्धि. नकारात्मकता का ह्रास. रोग-शोक से मुक्ति व मनोकामना की पूर्ति होती है।होलिका दहन की पूजा करने से होलिका की अग्नि में सभी दुःख. कष्ट.रोग-दोष जलकर खत्म हो जाते हैं। होलिका के जलने के बाद उसमें चना या गेहूं की बाली को पकाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से स्वास्थ्य अनुकूल. दीर्घायु.ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। होलिका दहन के भस्म को पवित्र माना गया है।होली के दिन संध्या बेला में भस्म का टीका लगाने से सुख-समृद्धि और आयु में वृद्धि होती है। हाेलिका दहन के साथ भगवान से नई फसल की खुशहाली की कामना की जाती है। होलिका पूजन के दौरान मेष, वृश्चिक, सिंह, व वृष राशि वाले गुड़ की आहुति दें। मिथुन, तुला व कन्या कर्पूर की आहुति दें। कर्क राशि वाले गुगुल, धनु व मीन जौ और चने व मकर एवं कुंभ राशि वाले तिल को आहुति के रूप में होलिका में अर्पण करें।

