Thursday, January 15, 2026
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मुख्यमंत्री योगी ने कल्याण सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

लखनऊ, 05 जनवरी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राजस्थान के पूर्व
राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ को उनकी जयंती के अवसर पर
पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धेय बाबूजी का संपूर्ण जीवन
सुशासन, विकास, सामाजिक न्याय और राष्ट्रवादी विचारधारा को समर्पित रहा। उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रदेश को नई दिशा देने वाला रहा, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “बाबूजी ने अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ से जोड़कर जीवन भर उसे सार्थक
किया। उन्होंने जनहित, कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में जो मजबूत नींव रखी, वह आज भी
प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के लिए मार्गदर्शक है।” उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह केवल एक
कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि रामभक्ति, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट आस्था के प्रतीक थे।

कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।
योगी ने कहा, “बाबूजी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी सादगी, स्पष्ट
सोच और निर्णय क्षमता आज भी जनसेवा से जुड़े लोगों को मार्ग दिखाती है। प्रदेश सरकार उनके
आदर्शों और मूल्यों पर चलते हुए सुशासन और विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है।” मुख्यमंत्री ने
अंत में पद्म विभूषण कल्याण की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि प्रदेश और देश उन्हें
सदैव आदर और सम्मान के साथ याद करता रहेगा।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह राजनीति के ऐसे मझे हुए नेता थे, जिन्होंने जिस ओर
कदम बढ़ा दिए फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। हानि, लाभ की चिंता नहीं की। सियासत में न तो कभी
झुके और न समझौता किया। अपनी शर्तों पर राजनीति की। अयोध्या में विवादित ढांचा ढहने के बाद
उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी को त्याग दिया। पूर्व मुख्यमंत्री का 94वां जन्मदिवस है। मुख्य आयोजन
लखनऊ में आयोजित किया गया है।

कल्याण सिंह की राजनीतिक शुरुआत संघर्षों से भरी रही। छात्र जीवन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से
जुड़ गए थे। 1950 के दशक में शिक्षक से राजनीति में प्रवेश कर गए। परिवार में राजनीति से कोई
था नहीं, इसलिए संघर्ष को स्वीकार किया और सियासी मैदान में कूद पड़े। पहले चुनाव में हार हुई,
मगर दूसरे चुनाव में 1967 में ही प्रतिद्वंद्वी को पटकनी दे दी। यहीं से कल्याण सिंह की राजनीति
का सूरज उदय हुआ। फिर जीवन भर सियासी सूरज की चमक कम नहीं होने दी।

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