Sunday, March 22, 2026
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अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतिक दशहरा पर्व : रामचंद्र जडौला ने कहा

ढांड, 1 अक्तूबर । हैफेड के पूर्व डायरैक्टर एवं प्रसिद्ध समाजसेवी रामचंद्र जडौला ने कहा कि दशहरा का पर्व दस प्रकार के पाप काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को हरता है। दशहरे का पर्व इन्हीं पापों के परित्याग की सप्रेरणा प्रदान करता है। नई अनाज मंडी ढांड में अपने प्रतिष्ठान पर एक विशेष भेंटवार्ता में बातचीत

करते हुए रामचंद्र जडौला ने सभी को दशहरा पर्व की बधाई देते हुए कहा कि भगवान श्री राम और रावण की कथा तो हम सब जानते ही है, जिसमें राम को भगवान विष्णु का एक अवतार बताया गया है। वे चाहते तो अपनी शक्तियों से सीता को छुड़ा सकते थे, लेकिन मानव जाति को यह पाठ पढ़ाने के लिए कि उन्होंने ऐसा नहीं किया। हमेशा बुराई अच्छाई से नीचे

रहती है और चाहे अंधेरा कितना भी घना क्यूं न हो एक दिन मिट ही जाता है। समाजसेवी रामचंद्र जडौला ने कहा कि यह बुराई केवल स्त्री हरण से जुड़ी नहीं है। आज तो हजारों स्त्रियों का हरण होता है, महिलाओं को जिंदा जला देते हैं, बलात्कार के मामले बढ़ते जा रहे हैं, देश में शराबखोरी और नशे की लत से युवा घिरे हुए हैं। वे युवा जिन्हें 21वीं सदी में

भारत को सिरमौर बनाने की जिम्मेदारी उठाने वाला कहा जाता है वे नशे की लत से ग्रस्त हैं। रामचंद्र जडौला ने कहा कि असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतिक है। हर इंसान को बुरे कार्यों का त्याग कर देश, मानवता व समाज की भलाई में अपना योगदान देना चाहिए।

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