फरीदाबाद, 04 फरवरी। 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला हरियाणा प्रदेश ही नहीं
अपितु देश के अन्य राज्यों के हस्तशिल्पियों को भी अपनी हस्तकला का प्रदर्शन करने के लिए
बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है। सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में आए ऐसे ही एक हस्तशिल्पी हैं
तिरुपति बालाजी से आए फूला चंदू। फूला चंदू सूरजकुंड मेला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर
लोक व आत्मनिर्भर भारत विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। फूला चंदू को को
लकड़ी पर नक्काशी करने में महारथ हासिल है, जिसके माध्यम से वे लकड़ी पर गजब की नक्काशी
करते हैं और लकड़ी को भगवान की मूर्तियों का रूप देते हैं। फूला चंदू द्वारा लगाई गई स्टॉल दर्शकों
को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। फूला चंदू ने
बताया कि लकड़ी से मूर्तियां बनाने की कला को वुड कार्विंग कहा जाता है। उन्होंने गेट नंबर 3 पर
फूला वुड कार्विंग के नाम से शॉप लगाई हुई है, जिसका नंबर 1284 है। वे काफी समय से इस काम
को कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मूर्तियां व अन्य सामान बेशक लकड़ी से बनाया जाता हैं लेकिन ये
सालों तक चलती है और इनकी चमक भी सालों-साल बरकरार रहती है। मूर्तियां बनाने में संगवान,
महागनी आदि लकडिय़ों का प्रयोग किया जाता है। फूला चंदू ने बताया कि उन्हें वुड कार्विंग कला
उनके पिता से विरासत में मिली है। वे काफी समय से वुड कार्विंग यानी लकड़ी से मूर्तियां व अन्य
सामान बनाने का काम कर रहे हैं। इस काम में बहुत मेहनत लगती है क्योंकि इसमें मशीन का
इस्तेमाल नहीं किया जाता। बल्कि मूर्तियां और अन्य सामान हाथ से ही बनाया जाता है। इसमें
काफी समय भी लग जाता है। क्योंकि पहले लकड़ी को काटा जाता है फिर सुखाया जाता है। हाथ से
ही इन पर ड्राइंग की जाती है। फिर उसकी कटिंग करते हुए तराशा जाता है। तब जाकर ये खूबसूरत
मूर्तियों का रूप लेती हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने इस पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं। वे
सूरजकुंड मेला में विभिन्न देवी-देवताओं व अन्य प्रकार की 1 फीट से 6 फीट तक की लकड़ी की
मूर्तियां लेकर आए हैं। दशरथ बताते हैं कि 6 फीट की एक प्रतिमा को बनाने में करीब 6 महीने का
समय लगता है।

