Wednesday, February 4, 2026
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सुमेश बंसल काका और गोल्डी बंसल ने रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर अर्पित किए श्रद्धा सुमन, कहा— हर युग में प्रेरणा हैं वे वीरांगना

इंडिया गौरव, राहुल सीवन। आज 18 जून का दिन भारतीय इतिहास में गौरव और गर्व से भरा हुआ दिन है, क्योंकि इसी दिन 1858 में झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई ने देश की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों से युद्ध करते हुए वीरगति पाई थी। इस अवसर पर अग्रवाल सभा सीवन के प्रधान व प्रमुख समाजसेवी सुमेश बंसल काका और युवा समाजसेवी गोल्डी बंसल ने झांसी की रानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

सुमेश बंसल काका ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई एक ऐसी वीरांगना थी जिन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि एक नारी न केवल घर-संभाल सकती है बल्कि देश की रक्षा के लिए शत्रुओं से युद्ध भी कर सकती है। उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति में जब पूरा भारत अंग्रेजी शासन के अधीन था, तब मात्र 23 वर्ष की आयु में लक्ष्मीबाई ने स्वराज के लिए संघर्ष किया और अपनी जान की बाजी लगा दी। उन्होंने नारी शक्ति को नया स्वरूप दिया और इतिहास के पन्नों में अपनी बहादुरी से अमर हो गई।

गोल्डी बंसल ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का जीवन केवल इतिहास की बात नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जब झांसी पर आक्रमण हुआ, तब रानी ने ना केवल मोर्चा संभाला बल्कि अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बांधकर घोड़े पर सवार होकर युद्ध किया। यह दृश्य आज भी हर देशभक्त की आंखों में गर्व और श्रद्धा का भाव भर देता है।

दोनों समाजसेवियों ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई जैसी महान वीरांगनाओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए और हमें चाहिए कि हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आजादी केवल स्वतंत्रता दिवस मनाने से पूरी नहीं होती, बल्कि देश के प्रति कर्तव्य निभाने से होती है।

कार्यक्रम के अंत में दीप प्रज्ज्वलन कर और राष्ट्रगान गाकर रानी लक्ष्मी बाई को नमन किया गया। 

रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि यह एक प्रेरणा थी कि आज भी अगर हम चाहें, तो देश, समाज और सत्य के लिए खड़े हो सकते हैं। उनके जीवन की गाथा यह बताती है कि वीरता, नारीत्व और देशभक्ति किसी काल विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि हर युग की आवश्यकता है। 

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