नई दिल्ली, 02 जनवरी । कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त आवंटन नहीं होने से पूर्व
सैनिकों के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजना पूरी तरह से चरमरा गयी है इसलिए जरूरी कदम उठाते
हुए सरकार को इसे दुरुस्त करने के तत्काल उपाय करने चाहिए।
कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के प्रमुख कर्नल रोहित चौधरी ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में
संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गत 29 दिसंबर को रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति की
बैठक हुई जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सैनिकों से जुड़े कई सवाल उठाते हुए
कहा कि पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य योजना पूरी तरह से चरमराई हुई है। करीब 20 लाख जवानों के
स्वास्थ्य उपचार बिल अभी पेंडिंग में है। बिल का ये आंकड़ा नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का है।
उन्होंने कहा कि लंबित बिलों की यह राशि बताती है कि मोदी सरकार ने रक्षा के तंत्र और मैकेनिज्म
को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम कर देने वाले सैनिकों को जब
इलाज की जरूरत है तो सरकार के पास बजट का आवंटन तक नहीं है। जवानों को भरोसा रहता है
कि सेवानिवृत्ति के बाद सरकार उनका और उनके परिवार का ध्यान रखेगी, लेकिन मोदी सरकार इस
भरोसे के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश कर रही है।
कर्नल चौधरी ने कहा कि 2003 में सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य
योजना (ईसीएचएस) शुरु की और कहा था कि यह नकदी रहित और सीमा रहित योजना होगी। वहीं,
नियंत्रक और महालेखा परीक्षक-कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि इतने दिनों में पूर्व सैनिकों की
तादाद बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार ने उसके हिसाब से न ढांचागत व्यवस्था तैयार किया है और
न ही निधि को बढ़ाया गया है। कैग की रिपोर्ट बताती है कि सेना में जवानों की कमी है और जल्द
से जल्द इसे पूरा किया जाए।
ईएससीएस की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने इसमें सुधार लाने की मांग की और कहा
कि पूरी तरह से तबाही की कगार पर खड़ी इस योजना के लिए पर्याप्त राशि दी जानी चाहिए। उनका
कहना था कि इस योजना के लिए साल 2023-24 में 13,500 करोड़ रुपए की जरूरत थी लेकिन
बदले में सिर्फ 9,831 करोड़ रुपए मिले। तब कैरीफॉरवर्ड लायबिलिटी-सीएलएफ करीब 3,500 करोड़
रुपए थी जो 2024-2025 में 5,400 करोड़ रुपए हो गई। यही सीएलएफ अब 2025-2026 में 6,000
करोड़ रुपए हो जाएगी और यदि इसके लिए 8,000 करोड़ रुपए का बजट मिलता है तो पिछले साल
के बिल के भुगतान में ही 6,000 करोड़ रुपए खर्च हो जाएंगे और सिर्फ 2,000 करोड़ रुपए ही बचेंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार का पूर्व सैनिक कल्याण विभाग किसी भी हाल में ईएससीएचसी को
चलाने में सक्षम नहीं है इसलिए इसे सीडीएस में डाल देना चाहिए और पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने
ईसीएचएस की जो प्रशासनिक ताकत छीनी है उसे बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए 14
हजार करोड़ रुपए के आवंटन की मांग की और कहा कि लंबित बिलों का निपटारा किया जाना
चाहिए। उनका कहना था कि पूर्व सैनिकों का मान-सम्मान के साथ इलाज होना चाहिए और अगर
ऐसा नहीं होता है तो 30 जनवरी के बाद पूर्व सैनिक दिल्ली आएंगे।

