नई दिल्ली, 08 मार्च। आप नियमित जिम जाने के अलावा प्रोटीन सप्लीमेंट का
भी इस्तेमाल करते हैं तो जरा संभल कर करें। बाजार में नामी ब्रांडों के नाम पर नकली प्रोटीन सप्लीमेंट की भरमार
है, जिम संचालक या दुकानदार आपको ऑफर का लालच देकर कम कीमत में नकली सप्लीमेंट मुहैया सकता है।
डाॅक्टराें का कहना है कि नकली सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने वाले को किसी आर्गन संबंधी गंभीर बीमारी हो सकती
है। नकली प्रोटीन सप्लीमेंट बनाकर बेचने के मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपित पिछले तीन साल से इस
तरह का धंधा कर रहे थे। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस दौरान इन्होंने कहां-कहां और कितने नकली प्रोटीन
सप्लीमेंट की आपूर्ति की।
इनमें मुख्य आरोपित मोहित दीक्षित है जो मूलरूप से यूपी के हरदोई का रहने वाला है। वह अवैध तरीके से नकली
न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट बनाने का काम कर रहा था। माल्टो, प्रोटीन पाउडर, कोको पाउडर, मिल्क पाउडर जैसे कच्चे
माल का इस्तेमाल नकली सप्लीमेंट तैयार करने में किया जाता था। इन सामानों को मिक्सर मशीन में मिलाने के बाद
उक्त पाउडर को लैब्राडा, आइसो गोल्ड और सुपर मास गेनर जैसे ब्रांड के लेबल वाले प्लास्टिक कंटेनर में पैक कर
बाजारों में बेच देता था।
मोहित तिवारी ने शुरू में चांदनी चौक में आयुर्वेदिक दवा सप्लाई का काम शुरू किया और बाद में 2020 तक एक
फ़ूड सप्लीमेंट की दुकान पर काम किया। दुकान बंद होने के बाद, उसने दिल्ली के अलग-अलग बाजारों से फूड
सप्लीमेंट खरीदना और उन्हें जिम में सप्लाई करना शुरू कर दिया। इस दौरान, वह अनिल बिस्वा के संपर्क में आया,
जो अवैध तरीके से न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट बनाने में शामिल था। 2022 से, मोहित तिवारी, अनिल बिस्वा के साथ
मिलकर नकली यह धंधा कर रहा था।

