नई दिल्ली, 15 मार्च। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) एक ‘राष्ट्रीय लैंगिक
मंच’ विकसित कर रही है, जो कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों सहित 900 से अधिक संस्थानों
को एक सूत्र में पिरोएगा। इस मंच का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं पर केंद्रित अनुसंधान, क्षमता
निर्माण और विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ करना है। डेयरी सचिव और आईसीएआर महानिदेशक डॉ.
एम.एल. जाट ने यहां आयोजित ‘कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं पर वैश्विक सम्मेलन’ 2026 में यह
जानकारी दी। यह सम्मेलन शनिवार को एक नई ऊर्जा और भविष्य के संकल्पों के साथ संपन्न हुआ।
तीन दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में 18 देशों के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और महिला
नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के नेतृत्व,
भागीदारी और नवाचार को सशक्त बनाना था। समापन सत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली
नीतियों और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य
अतिथि डॉ. जाट ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को निर्णय लेने की भूमिकाओं में लाने से न केवल
समानता आएगी, बल्कि कृषि उत्पादकता और इसके लाभप्रद होने में भी भारी वृद्धि होगी।
सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत की गई मुख्य सिफारिशों में महिलाओं को केवल संरक्षक के बजाय ‘उद्यमी’
बनाने, उन्हें ऋण और बाजार तक आसान पहुंच प्रदान करने और बीज मूल्य श्रृंखलाओं में नियामक
प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में ‘वन हेल्थ फ्रेमवर्क’ के तहत कृषि, पोषण,
स्वास्थ्य और पर्यावरण स्थिरता को एकीकृत करने की बात कही गई। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने डिजिटल
विभाजन को पाटने और महिलाओं को जलवायु-लचीली कृषि तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता जताई।
प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से सरकारी कार्यक्रमों, निजी क्षेत्र और विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत
समन्वय का आह्वान किया ताकि महिला उद्यमियों के लिए एक एकीकृत सहायता प्रणाली विकसित की
जा सके। उल्लेखनीय है कि इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का उद्घाटन 12 मार्च को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी
मुर्मु ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की गरिमामई उपस्थिति में किया था।

