बीजिंग, 02 जुलाई । चीन ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री ली क्विंग इस सप्ताह के अंत
में ब्राजील में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इससे उन खबरों की पुष्टि
हो गई है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 साल पहले सत्ता संभालने के बाद पहली बार समूह की बैठक में शामिल नहीं होंगे।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां एक प्रेस वार्ता में बताया कि ली निमंत्रण पर पांच से
आठ जुलाई तक ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित होने वाले 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
हालांकि, उन्होंने इस सवाल को टाल दिया कि शी चिनफिंग ने इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का
फैसला क्यों किया। शी सत्ता में अपने 12 साल के कार्यकाल के दौरान हमेशा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
में शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रियो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स में पांच अतिरिक्त सदस्य
मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को शामिल किया गया है।
पिछले साल रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण हो गया था, क्योंकि मोदी
और शी दोनों ने वहां मुलाकात की थी, जिससे पूर्वी लद्दाख में गतिरोध के कारण द्विपक्षीय संबंधों
में चार साल से जारी गतिरोध समाप्त हो गया था।
बैठक के बाद दोनों पक्षों ने विभिन्न द्विपक्षीय वार्ता तंत्रों को बहाल करने पर सहमति जताई थी।
मोदी-शी वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के उद्देश्य से पिछले कुछ
महीनों में कई बैठकें कीं।
रियो शिखर सम्मेलन में भाग न लेने के शी के फैसले को देखते हुए, शी-मोदी बैठक का अगला
अवसर चीन में आयोजित होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन हो सकता है, यदि प्रधानमंत्री मोदी
उसमें भाग लेते हैं तो।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वर्तमान अध्यक्ष चीन की इस साल के अंत में शिखर सम्मेलन
आयोजित करने की योजना है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बारे में माओ निंग ने कहा कि यह समूह उभरते बाजारों और विकासशील
देशों के बीच एकजुटता और सहयोग के लिए सबसे महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है तथा एक
समान एवं व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण को आगे बढ़ाने में एक
प्रमुख शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने कहा कि चीन सभी पक्षों के साथ मिलकर ब्रिक्स रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने,
बहुपक्षवाद को कायम रखने, साझा विकास को बढ़ावा देने, वैश्विक शासन में सुधार लाने और ब्रिक्स
सहयोग ढांचे के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है।

