Wednesday, March 11, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशप्रदेश के हर गांव में पहुंचेगी परिवहन की बसें

प्रदेश के हर गांव में पहुंचेगी परिवहन की बसें

लखनऊ, 10 मार्च । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में हुई
मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026 समेत 30 अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिली है।
बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राजस्व मंत्री रविन्द्र
जायसवाल ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के सभी 59 हजार ग्राम सभाओं तक बस पहुंचाने का निर्णय
लिया है। मंगलवार को लोकभवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026

प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब प्रदेश के
हर ग्रामसभा से बस होकर गुजरेगी। मौजूदा समय में लगभग 12 हजार ग्रामसभाओं में बसें नहीं जा पा रही हैं।
उन गांवों तक बस पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। उप्र परिवहन निगम के पास तीन हजार बसें हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी बसें चलाई जाएंगी और बसें 28 सीटर होंगी। निजी क्षेत्र की बसों को अनुंबंधित कर
चलाया जाएगा। किराया का निर्धारण जिला अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय गठित कमेटी वहां की
परिस्थिति को देखते हुए करेगी। जिलावार गठित कमेटी अपने-अपने जिलों के लिए बसों का अनुबंध करेगी।
बसाें के संचालन का समय निर्धारण जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। ताकि गांव के लोग
समय से जिला मुख्यालय पहुंच सकें। अपना काम पूरा कर वापस सयम से गांव आ जाएं।

दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब ओला, ऊबर जैसी कम्पनियों को उप्र परिवहन निगम में पंजीकरण कराना
होगा। हर पांच साल में उन्हें पांच हजार रुपये शुल्क देकर पंजीकरण रिन्यू कराना होगा। इससे प्रदेश की सड़कों
पर चलने वाले ऐसे वाहनों के बारे में पूरी जानकारी होगी। परिवहन निगम एक ऐप भी बनाएगा। उसमें ओला,

ऊबर की गाड़ियों और उसके चालक की पूरी जानकारी होगी। ओला ऊबर को भी एक ऐप बनाना होगा। यह ऐप
आम जन के लिए उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि यूपीएसआरटीसी की ऐसी कोई बस नहीं है जिसमें जीपीएस
सिस्टम नहीं लगा हो। सभी बसों की पूरी निगरानी की जा रही है।

स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अब प्रापर्टी बेचने वाले की पहचान को खतौनी में
देखा जाएगा। स्टाम्प निबंधन विभाग अब मालिकाना हक को चेक करेगा। बिना मालिकियत को जांच किए अब
स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा। विभाग के मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि सर्किल रेट
के आधार पर ही स्टाम्प शुल्क लगेगा। नगर निगम सीमा के अंदर दो प्रतिशत विकास शुल्क अलग से देय
होगा।

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