गाजियाबाद, 27 जून । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने शुक्रवार को
यहाँ कहा कि आपातकाल कांग्रेस की सत्ता लोलुपता और तानाशाही मानसिकता का प्रतीक है। 1975
में लगाया गया आपातकाल कोई राष्ट्रीय संकट नहीं था, यह एक डरी हुई प्रधानमंत्री द्वारा अपनी
कुर्सी बचाने के लिए देश को बंधक बनाने की साजिश थी।
गाजियाबाद में आयोजित एक प्रेसवार्ता में अरुण सिंह ने कहा कि देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा
गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कुचला था। प्रेस की स्वतंत्रता
खत्म की थी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपंग किया और लाखों देशवासियों को जेल में
डालकर देश को अंधकार युग में धकेल दिया।
उन्होंने कहा कि “आज 50 वर्ष बाद भी कांग्रेस की मानसिकता में कोई अंतर नहीं आया है। 1975 में
इंदिरा गांधी ने संविधान को रौंदा, आज वही प्रवृत्ति राहुल गांधी और उनके नेतृत्व में दिखाई देती है ।
आज भी प्रेस पर हमले होते हैं। विचारधारा के आधार पर मुकदमे दर्ज होते हैं, और डिजिटल माध्यम
से एक नई ‘डिजिटल इमरजेंसी’ थोपी जा रही है।
अरुण सिंह ने कहा कि शाह आयोग ने भी स्पष्ट कहा था कि आपातकाल पूरी तरह एक राजनीतिक
षड्यंत्र था, जिसका कोई संवैधानिक आधार नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने न तो आज तक माफी मांगी,
न ही शर्मिंदगी दिखाई। उल्टे, आज भी जब गांधी परिवार पर भ्रष्टाचार की जांच होती है, कांग्रेस
‘लोकतंत्र खतरे में है’ का शोर मचाने लगती है।
उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने न केवल न्यायपालिका को बंधक बनाया, बल्कि प्रेस की बिजली काट
दी, मीसा जैसे काले कानूनों से छात्रों, पत्रकारों, विपक्षी नेताओं को जेल में ठूंस दिया। उस दौर में
जिस किसी ने भी सवाल उठाया, उसे देशद्रोही बताया गया। आज कांग्रेस उसी मानसिकता को सोशल
मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागू कर रही है।”
आपातकाल सिर्फ एक घटना नहीं, कांग्रेस की सोच का प्रतिबिंब है। आज भी कांग्रेस सत्ता को परिवार
के लिए आरक्षित समझती है और लोकतंत्र को एक औपचारिकता मानती है। प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप
से भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक, सांसद अतुल गर्ग, मंत्री स्वतंत्र प्रभार
नरेंद्र कश्यप, पूर्व महापौर आशु वर्मा, विधायक संजीव शर्मा, भाजपा गाजियाबाद महानगर अध्यक्ष
मयंक गोयल, जिलाध्यक्ष चैन पाल सिंह, मीडिया प्रभारी प्रदीप चौधरी उपस्थित रहे।

